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सजा

Saturday, June 16, 2007

अपराधी- जज साहब! मैं शराब पिए हुए नहीं था, बल्कि शराब पी रहा था।
जज- तो ऐसा करते हैं कि तुम्हारी सजा एक महीने से घटाकर 30 दिन कर देते हैं।

सबकुछ फ्री है... Everything is Free

जज- मैं तुम्हें इसी वक्त हवालात भेज रहा हूँ।
मुजरिम- लेकिन जज साहब! चार्ज क्या है?
जज- तुम घबराओ नहीं! कोई चार्ज नहीं है, सबकुछ फ्री है।