Showing posts with label चोर. Show all posts
Showing posts with label चोर. Show all posts

नींद

Saturday, June 16, 2007

जज- तुम्हारी इतनी हिम्मत कि तुमने दिनदहाड़े चोरी की?
चोर- क्या करुँ सरकार! रात में मुझे बहुत नींद आती है, इसलिए मैंने दिन में ही चोरी की।